मंगलायतन विश्वविद्यालय परिसर स्थित महावीर दिगंबर जिन मंदिर में दशलक्षण पर्व का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर जैन भजनों की मधुर गूंज से गुंजायमान रहा। भगवान महावीर का प्रक्षाल, अभिषेक व विशेष दशलक्षण विधान संपन्न किया गया।
प्रो. सिद्धार्थ जैन ने ‘उत्तम क्षमा’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि क्षमा वह गुण है जो क्रोध और द्वेष को शांत कर मन को शुद्ध और शक्तिशाली बनाता है। क्षमाशील व्यक्ति अपने हृदय की विशालता प्रदर्शित करता है और जीवन में शांति व समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। कार्यक्रम में आगामी दस दिनों तक प्रतिदिन मंगल व्याख्यानों का आयोजन होगा। जिनमें विद्यार्थी व शिक्षक धर्म की गंगा में डुबकी लगाएंगे। कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने बताया कि क्षमा भाव शांति, समरसता को बढ़ावा देता है। विद्यार्थियों में सहानुभूति एवं सहयोग की भावना जागृत करता है। कुलसचिव ब्रिगेडियर समरवीर सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. दिनेश शर्मा, डीन एकेडमिक प्रो. राजीव शर्मा ने आयोजन की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं। नमन, अमन व अर्पित ने विधान को संपन्न कराया। समयक, आर्जव, गौतम ने अभिषेक में सहयोग किया। इस अवसर पर मयंक जैन, हर्षित, आयुष, शुभम, रजत, अंशिका, जैनम, आदित्य, अक्षत, आर्यन, निवेश, आगम, सौम्या, सृष्टि, हर्षिता आदि थे।
मंगलायतन विश्वविद्यालय में मनाया जा रहा दशलक्षण महापर्व
